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August 30, 2025 5:58 am

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!-त्रिचत्वारिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!-त्रिचत्वारिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !! ( त्रिचत्वारिंशत् अध्याय : ) गतांक से आगे – कान्चना! देख ….मेरी सासु माँ आईं हैं ……… विष्णुप्रिया के ऐसा कहने पर कान्चना द्वार पर गयी किन्तु शचि देवि नही आईं थीं । आज तीन दिन दो गये माँ अभी तक नही आईं ……विष्णुप्रिया उठ कर बैठ गयी है … Read more

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 43 !!-महाकाल का प्रेमरूप – “गोपेश्वर महादेव” भाग 2 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 43 !!-महाकाल का प्रेमरूप – “गोपेश्वर महादेव” भाग 2 : Niru Ashra

🙇‍♀️🙇‍♀️🙇‍♀️🙇‍♀️!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 43 !! महाकाल का प्रेमरूप – “गोपेश्वर महादेव”भाग 2 वो……..देवि लक्ष्मी आयी थीं …………ब्रह्माणी भी आयी थीं ……कह रही थीं …….कि श्रीधाम वृन्दावन में महारास होनें वाला है …………तो अंतरिक्ष से हम सब देखेंगी …………….पार्वती नें कहा । मैं भी चलूँगा ……और मैं भी दर्शन करूँगा ……महादेव नें कहा ……और चल पड़े …..। … Read more

उद्धव गोपी संवाद :६५ एवं ६६ : Niru Ashra

उद्धव गोपी संवाद :६५ एवं ६६ : Niru Ashra

उद्धव गोपी संवाद:६५ एवं ६६ धन्न धन्न ए लोग,भजत जो हरि कों ऐसें।और कोहू बिन रस हि,प्रेम पावत कहौ कैसे।।मेरे वा लघु ज्ञान कौ,रह्रौ जु मद ह्वै व्याधि।अब जान्यों ब्रज-प्रेम कौ,लहति न आधों -आधि।।– वृथा श्रम करि मरयौ-भावार्थ:ऊधौ जी कह रहे हैं कि ये लोग धन्य धन्य हैं जो अपने हरि को इस प्रकार से … Read more

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!- द्विचत्वारिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!- द्विचत्वारिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !! ( द्विचत्वारिंशत् अध्याय : ) गतांक से आगे – हे महामहिम ! क्या कहूँ आपको ? क्या सम्बोधन करूँ ? स्वामी ? नही , ये अधिकार मेरा छीन लिया है । मैं आपकी पत्नी आप मेरे स्वामी …ओह ! अच्छा होता ना , मैं आपकी पत्नी ही नही होती … Read more

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 43 !!-महाकाल का प्रेमरूप – “गोपेश्वर महादेव” भाग 1 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 43 !!-महाकाल का प्रेमरूप – “गोपेश्वर महादेव” भाग 1 : Niru Ashra

🙇‍♀️🙇‍♀️🙇‍♀️🙇‍♀️ !! “श्रीराधाचरितामृतम्” 43 !! महाकाल का प्रेमरूप – “गोपेश्वर महादेव”भाग 1 प्रेम में अहंकार का प्रवेश कहाँ ? क्या ये बात सच नही है कि पुरुष का अर्थ ही अहंकार होता है ? प्रेम की धरातल पर पुरुष का प्रवेश कहाँ है…….वहाँ तो सब गोपी हैं ….. हाँ पुरुष है भी तो एक ही … Read more

ગુજરાતના સ્થાપના દિન નિમિત્તે:-✍️✍️વાસ્તવિકતા જાણો આને સમજો.ભષ્ટાચાર આને બે નંબરની કમાણીમાંથી પૈસાદાર બનનારા નો ઈતિહાસ બનાવવામાં ગુજરાત મોખરે

ગુજરાતના સ્થાપના દિન નિમિત્તે:-✍️✍️વાસ્તવિકતા જાણો આને સમજો.ભષ્ટાચાર આને બે નંબરની કમાણીમાંથી પૈસાદાર બનનારા નો ઈતિહાસ બનાવવામાં ગુજરાત મોખરે

ગુજરાતના સ્થાપના દિન નિમિત્તે:-✍️✍️વાસ્તવિકતા જાણો આને સમજો.ભષ્ટાચાર આને બે નંબરની કમાણીમાંથી પૈસાદાર બનનારા નો ઈતિહાસ બનાવવામાં ગુજરાત મોખરે છે.કેનેડા કે અન્ય દેશોની બોર્ડર પરથી હરામખોરીથી પૈસા કમાવવા માટે અમેરિકામાં ધૂસણખોરી કરવા હરઃમનઈ કમાણીમાંથી કરોડ કરોડ રૂપિયાની લાલચ અને લાંચ પણ આપનારા ગુજરાતીઓ છે્.બોગસ પાસપોર્ટ બનાવનારા, ડુપ્લીકેટ માર્કશીટ અને ડિગ્રી સર્ટિફિકેટ, પરીક્ષામાં પેપર ફોડાવનારાઓ તથા ડમી … Read more

उद्धव गोपी संवाद(भ्रमर गीत)६३ एवं ६४ : Niru Ashra

उद्धव गोपी संवाद(भ्रमर गीत)६३ एवं ६४ : Niru Ashra

उद्धव गोपी संवाद(भ्रमर गीत)६३ एवं ६४ पुनि पुनि कहि ‘हरि’ कहन बात एकांत पठायौ।मैं इन कौ कछु मरम जानिं एकौ नहिं पायौ।।हों कहों निज मरजाद की,ग्यानें करमनिं रोपें।ए सब प्रेम असक्त ह्वै,रही लाज कुल लोपें।।– धन्न ए गोपिका –भावार्थ:उद्धव जी बार बार अपने मन में कह रहे हैं कि हरि अर्थात भगवान ने तो मुझे … Read more

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!-एकचत्वारिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!-एकचत्वारिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !! ( एकचत्वारिंशत् अध्याय : ) गतांक से आगे – गौरांग दौड़ रहे हैं ….नित्यानंद उनके पीछे हैं …..हे गौर ! रुक जाओ । हे गौर प्रभु , कहाँ जा रहे हैं आप ! रुक जाओ नाथ ! रुक जाओ । ये क्या हो गया था गौरांग को किसी को … Read more

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 42 !! -ओये ! तुमसे बतियाएँगी …भाग 3 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 42 !! -ओये ! तुमसे बतियाएँगी …भाग 3 : Niru Ashra

💕💕💕💕!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 42 !! ओये ! तुमसे बतियाएँगी …भाग 3 “तुम बुद्धिमान हो……हम तो गंवारन हैं ……..अब हमें समझा दो क्यों की समझानें में भी तुम निपुण हो…….श्रीराधा रानी नयन मिलाकर कृष्ण से बतिया रही थीं । क्या पूछना है …….पूछो ! श्याम सुन्दर नें हँसकर कहा । श्याम सुन्दर ! तीन प्रकार के लोग … Read more