!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!- पंचत्रिंशत् अध्याय : Niru Ashra
!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !! ( पंचत्रिंशत् अध्याय : ) गतांक से आगे – प्रेम की मधुरता , प्रेम का बंधन , प्रेम की शृंखला ….युक्ति सिद्धान्त और शास्त्र तत्व के विधि नियम के अन्तर्गत ये नही आते ….शास्त्रीय विधि निषेध को प्रेम मान्यता नही देता …उसके अपने शास्त्र हैं उसके अपने नियम हैं … Read more