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August 30, 2025 6:54 pm

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 45 !!-“श्रीराधा की को करे होड़” – एक प्रसंग : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 45 !!-“श्रीराधा की को करे होड़” – एक प्रसंग : Niru Ashra

🌻🌻🌻🌻!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 45 !! “श्रीराधा की को करे होड़” – एक प्रसंग मोम के घोड़े में बैठकर आग का दरिया पार करना – प्रेम है । परवाह अपनी जब छूटनें लगे , प्रियतम हमारे केंद्र में जम जाए – प्रेम है । अकेलापन अच्छा लगे, भीड़ भाड़ से अरुचि होजाये – प्रेम है । अपना … Read more

तत्कालीन गोवा बैंक ऑफ दमन प्रबंधक और एक जौहरी बैंक के साथ किए गए धोखाधड़ी

तत्कालीन गोवा बैंक ऑफ दमन प्रबंधक और एक जौहरी  बैंक के साथ किए गए धोखाधड़ी

|  दमन।तत्कालीन गोवा बैंक ऑफ दमनप्रबंधक और एक जौहरी को बैंक के साथ किए गए धोखाधड़ी के मामलों मेंदमन कोर्ट में 14 साल तक कार्यवाहीदौड़ रहा था  इस मामले में प्रबंधक वज्वैलर्स को 3 साल की कैद और 19 हजारजुर्माना कोर्ट ने लगाया है।  अभियुक्तवर्ष 2005-06 के दौरान 130कितने फर्जी गोल्ड लोन खाते खोले गए1.25 … Read more

विरही- गोपी- उध्धव छे- संवाद-६-भ्रमर -गीत🌹: Niru Ashra

विरही- गोपी- उध्धव छे- संवाद-६-भ्रमर -गीत🌹: Niru Ashra

🦚 विरही- गोपी- उध्धव छे- संवाद-६🦚 🌹 भ्रमर -गीत🌹 👉 श्रीकृष्ण – उध्दव संवाल- उध्धव को गोकुल क्यां भेजा ? 🪷 उद्धव कहते हैं,🙏 श्रीकृष्ण आप अलौकिक ऐश्वर्य नगरी मथुरा के मथुरानाथ हो। ६४ कलाओं में निपुण सब सुख-सुविधाएं, दास-दासियाँ सेवा में, फिर भी आपके मुखारविंद पर प्रसन्नता आनंद नजर नहीं आती है, आप हमेशा … Read more

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!-सप्तचत्वारिंशत् अध्याय: Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!-सप्तचत्वारिंशत् अध्याय: Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !! ( सप्तचत्वारिंशत् अध्याय: ) गतांक से आगे – शचिदेवि की बहन आज शचि देवि के घर आईं हैं ….सन्ध्या होने को है ….बातें करते करते समय बीत गया है ….बातें क्या ! वही निमाई की चर्चा । “मैंने भी देखा पर अच्छे से देख न पाई ….विष्णुप्रिया ने भी … Read more

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 44 !!-महारास भाग 3 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 44 !!-महारास भाग 3 : Niru Ashra

🙏🙏🙏🙏!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 44 !! महारासभाग 3 मध्य में रसशेखर श्याम सुन्दर ……..अपनी “श्री जी” के साथ ठुमुक रहे हैं ……इतना ही नही …….बाँसुरी भी बजा रहे हैं …….और गा भी रहे हैं …….श्याम सुन्दर और उनकी श्रीराधारानी अन्य गोपियों की ये मण्डली इतनी सुन्दर लग रही थी कि देवों को भी देह सुध न रही … Read more

🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚विरही- गोपी- उध्धव छे- संवाद-२🦚🌹 भ्रमर -गीत🌹

🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚विरही- गोपी- उध्धव छे- संवाद-२🦚🌹 भ्रमर -गीत🌹

🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚विरही- गोपी- उध्धव छे- संवाद-२🦚🌹 भ्रमर -गीत🌹 🌺। भ्रभरगीत महात्म्य-२🌺 🌻 गोस्वामी श्री हरिरायचरणजी आज्ञा करते “गोपिका गुरुवः भोक्ताः”👉 गोपियाँ पुष्टिजनों की गुरु है, पुष्टिभक्ति निष्काम, अहैतुकी, निःस्वार्थ है वैष्णवों को सिर्फ श्रीप्रभु के सुख की ही चाह होती है। 🌺 (नवधा भक्ति) संयोगात्मक – वियोगात्मक प्रेम जिसमें आतुरता प्रभु तरस, प्यास, व्याकुलता बिना प्रभु … Read more

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!-षट्चत्वारिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!-षट्चत्वारिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !! ( षट्चत्वारिंशत् अध्याय : ) गतांक से आगे – प्रिया ! बहु ! चल गंगा स्नान करके आते हैं ….. ब्रह्ममुहूर्त का समय है …अभी अंधकार ही है ….इसी समय शचि देवि नित्य गंगा नहाने जाती थीं …विष्णुप्रिया दो दिनों से गयी नही …वो अस्वस्थ है …ज्वर ग्रस्त है … Read more

“श्रीराधाचरितामृतम्” 44 !!-महारासभाग 2 : Niru Ashra

“श्रीराधाचरितामृतम्” 44 !!-महारासभाग 2 : Niru Ashra

🙏🙏🙏🙏!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 44 !! महारासभाग 2 हे वज्रनाभ ! यही महारास है । कोई नही है इस वृन्दावन में आज …………….. न कोई पुरुष है, न कोई स्त्री है, न कोई कृष्ण है न ही गोपी हैं । बस रस है …….मात्र एक ही तत्व है इस वृन्दावन में ……वो है रस । रस ही … Read more

ધાર્મિક કથા : ભાગ 190 – ભગવાન વિષ્ણુએ વરાહ સ્વરૂપે હિરણ્યાક્ષનો વધ કર્યા બાદ ભાઈ હિરણ્યકશિપુએ મંદરાચલ પર્વત પર ખૂબ કિઠન તપ કર્યું : Manoj Acharya

ધાર્મિક કથા : ભાગ 190 – ભગવાન વિષ્ણુએ વરાહ સ્વરૂપે હિરણ્યાક્ષનો વધ કર્યા બાદ ભાઈ હિરણ્યકશિપુએ મંદરાચલ પર્વત પર ખૂબ કિઠન તપ કર્યું : Manoj Acharya

ધાર્મિક કથા : ભાગ 190ધાર્મિક માન્યતાઓ મુજબ ભગવાન વિષ્ણુએ દૈત્ય હિરણ્યકશ્યપએ તેમના ભક્ત પ્રહલાદને બચાવવા માટે વૈશાખ મહીનાના શુકલ પક્ષની ચતુર્દશી તિથિ પર નરસિંહ અવતાર લીધો હતો. ભગવાનનો આ અવતાર અડધા નર અને અડધા સિંહનો છે જેના કારણે તેને નરસિંહ અવતાર કહેવાય છે, જેમનો આજે પ્રાગટય દિવસ છે.નરસિંહ (વિષ્ણુ) ભગવાન ચોથા અવતાર માનવામા આવે છે. … Read more

उद्धव गोपी संवाद(भ्रमर गीत)७३, ७४ एवं ७५ : Niru Ashra

उद्धव गोपी संवाद(भ्रमर गीत)७३, ७४ एवं ७५ : Niru Ashra

उद्धव गोपी संवाद(भ्रमर गीत)७३, ७४ एवं ७५ सुनति सखा के बेंन,नेंन भरि आए दोऊ।विवस प्रेम आवेस,रही नाहिंन सुधि कोऊ।।रोंम रोंम प्रति गोपिका,भई सांवरे गात।कलप तरोरूह सांवरौ,ब्रज वनिता ही पात।।– उलहि अंग अंग ते –भावार्थ:अपने प्रिय सखा ऊधौ जी के वचन सुनते ही श्यामसुंदर के दोनों नेत्रों में जल भर आया। प्रेम के आवेश में विवश … Read more